Saturday, October 21, 2017

भीष्म पितामह अनुसार राजा कैसा हो

महाभारत ज्ञान – एक राजा में आवश्यक है ये 36 गुण
पुरातन समय से लेकर लगभग एक सदी पहले तक हमारे देश में राजाओं का शासन था।  जहाँ कुछ राजाओं को हम उनकी नेकी, वीरता, बलिदान, सद्गुणों आदि के कारण याद करते है तो कुछ राजा अपने अवगुणों के कारण जाने जाते है।

एक राजा में क्या-क्या गुण होने चाहिए, इसका वर्णन महाभारत के शांति पर्व में विस्तार पूर्वक लिखा है। तीरों की शय्या पर लेटे भीष्म पितामह ने राजा के गुण, धर्म, आचरण आदि के बारे में युधिष्ठिर को बताया था। भीष्म पितामह ने युधिष्ठर को राज्यों के अत्यावश्यक  36 गुणों के बारे में बताया था। आज हम आपको राजा के उन्हीं गुणों के बारे में बता रहे हैं।

जानिए राजा में कौन-कौन से गुण होने चाहिए

1- शूरवीर बने, किंतु बढ़चढ़कर बातें न बनाए।

2- स्त्रियों का अधिक सेवन न करे।

3- किसी से ईष्र्या न करे और स्त्रियों की रक्षा करे।

4- जिन्होंने अपकार (अनुचित व्यवहार) किया हो, उनके प्रति कोमलता का बर्ताव न करे।

5- क्रूरता (जबर्दस्ती या अधिक कर लगाकर) का आश्रय लिए बिना ही अर्थ (धन) संग्रह करे।

6- अपनी मर्यादा में रहते हुए ही सुखों का उपभोग करे।

7- दीनता न लाते हुए ही प्रिय भाषण करे।

8- स्पष्ट व्यवहार करे पर कठोरता न आने दे।

9- दुष्टों के साथ मेल न करे।

10- बंधुओं से कलह न करे।

11- जो राजभक्त न हो ऐसे दूत से काम न ले।

12- किसी को कष्ट पहुंचाए बिना ही अपना कार्य करे।

13- दुष्टों से अपनी बात न कहे।

14- अपने गुणों का वर्णन न करे।

15- साधुओं का धन न छीने।

16- धर्म का आचरण करे, लेकिन व्यवहार में कटुता न आने दे।

17- आस्तिक रहते हुए दूसरों के साथ प्रेम का बर्ताव न छोड़े।

18- दान दे परंतु अपात्र (अयोग्य) को नहीं।

19- लोभियों को धन न दे।

20- जिन्होंने कभी अपकार (अनुचित व्यवहार) किया हो, उन पर विश्वास न करे।

21- शुद्ध रहे और किसी से घृणा न करे।

22- नीच व्यक्तियों का आश्रय न ले।

23- अच्छी तरह जांच-पड़ताल किए बिना किसी को दंड न दे।

24- गुप्त मंत्रणा (बात या राज) को प्रकट (किसी को न बताए) न करे।

25- आदरणीय लोगों का बिना अभिमान किए सम्मान करे।

26- गुरु की निष्कपट भाव से सेवा करे।

27- बिना घमंड के भगवान का पूजन करे।

28- अनिंदित (जिसकी कोई बुराई न करे, ऐसा काम) उपाय से लक्ष्मी (धन) प्राप्त करने की इच्छा रखे।

29- स्नेह पूर्वक बड़ों की सेवा करे।

30- कार्यकुशल हो, किंतु अवसर का विचार रखे।

31- केवल पिंड छुड़ाने के लिए किसी से चिकनी-चुपड़ी बातें न करे।

32- किसी पर कृपा करते समय आक्षेप (दोष) न करे।

33- बिना जाने किसी पर प्रहार न करे।

34- शत्रुओं को मारकर शोक न करे।

35- अचानक क्रोध न करे।

36- स्वादिष्ट होने पर भी अहितकर (शरीर को रोगी बनाने वाला) हो, उसे न खाए।

Saturday, September 2, 2017

यक्ष-युधिष्ठिर संवाद



*🌷यक्ष-युधिष्ठिर की वार्ता🌷*


*यक्ष― कः पंडितः पुमान् ज्ञेयो ।*
*नास्तिकः कश्च उच्यते?*
*को मूर्खश्च कामः स्यात्;*
*को मत्सर इति स्मृतः ?*
कौन पंडित है? कौन नास्तिक है? कौन मूर्ख है और काम क्या है? तथा डाह किसे कहा गया है?



*युधिष्ठिर― धर्मज्ञः पंडितो ज्ञेयो ।*
*नास्तिको मूर्ख उच्यते ।।*
*कामः संसार हेतुश्च ।*
*ह्रत्तापो मत्सरः स्मृतः ।।*
धर्म का जानने वाला ही पंडित है। नास्तिक ही मूर्ख है। काम संसार का हेतु (कारण) है और ह्रदय का ताप ही डाह (ईर्ष्या) है।



*यक्ष― तपः किम् लक्षणम् प्रोक्त*
*को दमश्च प्रकीर्तितः ?*
*क्षमा च का परा प्रोक्ता,*
*का च ह्री परिकीर्तिता ?*
तप किसे कहते हैं? दम किसे कहते हैं? क्षमा और लज्जा किसे कहते हैं?



*युधिष्ठिर― तपः स्वधर्मे वर्तित्वं ।*
*मनसो दमनं दमः ।।*
*क्षमा द्वन्द्व-सहिष्णुत्वं ।*
*ह्रीरकार्य निवर्तनम् ।।*
अपने धर्म में स्थित रहना ही सबसे बड़ा तप है। मन को वश में करना ही दम है। कष्टों और प्रपंचों को सह लेना ही क्षमा है तथा अकार्यों से दूर रहना ही सच्ची लज्जा है।




Wednesday, August 16, 2017

*जब भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को फटकारा*

*जब भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को फटकारा*

महाभारत युद्ध का आखिरी दिन था। दुर्योधन कुरुक्षेत्र स्थित तालाब में जाकर छुप गया। सारी कौरव सेना समाप्त हो चुकी थी। दुर्योधन के अलावा कृपाचार्य, अश्वत्थामा, कृतवर्मा ही कौरव सेना में शेष बचे थे। पांडव दुर्योधन को खोजते हुए उस तालाब के किनारे पहुंचे। तालाब में छिपे दुर्योधन से युधिष्ठिर ने बात की। दुर्योधन ने कहा कि तुम पांच भाई हो और मैं अकेला हूं। हममें युद्ध कैसे हो सकता है? तो युधिष्ठिर ने दुर्योधन से कहा कि हम पांचों तुम्हारे साथ नहीं लड़ेंगे। तुम हममें से किसी एक को युद्ध के लिए चुन लो। अगर तुमने उसे हरा दिया तो हम तुम्हें युद्ध में जीता मानकर राज्य तुम्हें सौंप देंगे।
युधिष्ठिर की बात सुन श्रीकृष्ण को क्रोध आ गया। उन्होंने युधिष्ठिर से कहा कि तुमने ये क्या किया? इतने भीषण युद्ध के बाद हाथ आई जीत को हार में बदल लिया। ये युद्ध है, इसमें जुए का नियम मत लगाओ। अगर दुर्योधन ने नकुल, सहदेव में से किसी एक को युद्ध के लिए चुन लिया तो वे प्राणों से भी जाएंगे और हमारे हाथ से वो राज्य भी चला जाएगा।
लाइफ मैनेजमेंट- आपको किसी भी वादे को करने से पहले उस पर ठीक से विचार तो करना चाहिए। ऐसे बिना सोचे-समझे ही अपना सबकुछ दांव पर कैसे लगाया जा सकता है।

Tuesday, August 15, 2017

*जब अश्वत्थामा ने मांग लिया कृष्ण का सुदर्शन चक्र*

*जब अश्वत्थामा ने मांग लिया कृष्ण का सुदर्शन चक्र*

एक बार पांडव और कौरवों के गुरु द्रोणाचार्य का पुत्र अश्वत्थामा द्वारिका पहुंच गया। भगवान कृष्ण ने उसका बहुत स्वागत किया और उसे अतिथि के रूप में अपने महल में ठहराया। कुछ दिन वहां रहने के बाद एक दिन अश्वत्थामा ने श्रीकृष्ण से कहा कि वो उसका अजेय ब्रह्मास्त्र लेकर उसे अपना सुदर्शन चक्र दे दें। भगवान ने कहा ठीक है, मेरे किसी भी अस्त्र में से जो तुम चाहो, वो उठा लो। मुझे तुमसे बदले में कुछ भी नहीं चाहिए। अश्वत्थामा ने भगवान के सुदर्शन चक्र को उठाने का प्रयास किया, लेकिन वो टस से मस नहीं हुआ।
उसने कई बार प्रयास किया, लेकिन हर बार उसे असफलता मिली। उसने हारकर भगवान से चक्र न लेने की बात कही। भगवान ने उसे समझाया कि अतिथि की अपनी सीमा होती है। उसे कभी वो चीजें नहीं मांगनी चाहिए जो उसके सामर्थ्य से बाहर हो। श्रीकृष्ण ने कहा कि ये चक्र मुझे अत्यंत प्रिय है। इसे 12 साल तक घोर तपस्या करने के बाद पाया है, उसे तुमने ऐसे ही मांग लिया। बिना किसी प्रयास के। अश्वत्थामा बहुत शर्मिंदा हुआ। वह बिना किसी शस्त्र-अस्त्र को लिए ही द्वारिका से चला गया।
लाइफ मैनेजमेंट- अपनी कोशिश के अनुपात में ही फल की आशा करना चाहिए। साथ ही, किसी से कुछ भी मांगते समय भी अपनी मर्यादाओं का ध्यान रखना चाहिए।

Friday, July 7, 2017

जब द्रौपदी ने दोनों हाथ उठाए तब प्रभु आए

*🌹🌿🌹🌿राधे राधे दोस्तों।🌿🌹🌿🌹🌿*

*🌿🌹🌿🌹🌿⛳⛳☘🌺आपने देखा होगा कि दोनों हाथ उठा कर राधे राधे,जय श्री श्याम,हर हर महादेव किया जाता है;वो क्यों किया जाता हैं मैं आपको बताता हूँ☘🌺☘*

*☘🌺☘आप सभी को स्मरण होगा जब महारानी द्रौपदी भरी सभा में अपने पाँच अतिबलशाली पतियों , पितामह भीष्म , गुरू , सभी से विनती करती रही ,☘🌺☘*

*☘🌺☘अपनी लाज बचाने व स्वयं ही साडी़ पकड़ कर एक असफल प्रयास करती रहीं पर जब कोई भी लाज़ बचाने ना आया ........☘🌺☘*

*☘🌺☘तो बस अपने प्रिय सखा को साडी़ को छोड़कर दोनों हाथों को ऊपर उठाकर करूण पुकार लगाई ....☘🌺☘*

*☘🌺☘प्रभु ने एक क्षण ना लगाया द्रौपदी की लाज बचाने में 999 साडियाँ पहनाई श्री केशव ने .......☘🌺☘*

*☘🌺☘हम लोग अपने दोनों हाथो को ऊपर उठा कर 🙌🏻 कीर्तन, सत्संग क्यों करते हो जबकि ये तो बिना हाथ ऊपर करे भी किया जा सकता हैं ?☘🌺☘*

*☘🌺☘श्रील प्रभुपाद बताते है बच्चा जब छोटा होता हैं, तब वो अपनी माँ को देख कर अपने दोनों हाथो को ऊपर उठा कर मचलने लगता हैं, तड़पने लगता हैं वो ये कहना चाहता हैं की मुझे अपनी गोद में उठा कर अपने सीने से लगा लो, ठीक वैसे हैं जब एक भक्त हाथ उठा कर सत्संग करता हैं तो वो ये कहना चाहता हैं कि,☘🌺☘*

*"हे गोविन्द" "हे करुणानिधान" "हे गोपाल" "हे मेरे नाथ "*

*☘🌺☘ आप मेरा हाथ पकड़ लो और मुझे इस भव सागर से इस दुखरूपी भौतिक संसार से बाहर निकाल कर अपने चरणों से लगा लो मेरे जीवन की नय्या को पार लगा दो प्रभु मुझे इन 84 लाख योनियों के चक्कर से मुक्ति दीजिये "गोविन्द"..*
*!! हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ! हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे !!⛳⛳⛳🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿*

Saturday, July 1, 2017

महाभारत में युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से पूछा था कि घर में सुख-समृद्धि बनाए रखने

🙏 ये पांच चीजें होती हैं *पवित्र , हमेशा रखनी चाहिए घर में !!

=============================

महाभारत में युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से पूछा था कि घर में सुख-समृद्धि बनाए रखने के लिए कौन-कौन सी बातों का ध्यान रखना चाहिए। तब श्री कृष्ण ने बहुत सी बातें बताई थीं, उन्हीं बातों में कुछ चीजें ऐसी बताई थीं जो हमें घर में हमेशा रखनी चाहिए। यहां जानिए ये चीजें कौन-कौन सी हैं...

🙏1. चंदन :-

चंदन बहुत ही पवित्र माना गया है। इसकी महक से वातावरण की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है। सभी देवी-देवताओं की पूजा में भी चंदन का विशेष महत्व है। चंदन का तिलक लगाया जाता है। इसके तिलक से मन को शांति मिलती है। चंदन घर में हमेशा रखना चाहिए, क्योंकि हर रोज पूजा करते समय देवी-देवताओं को चंदन अर्पित करना चाहिए।

🙏2. वीणा :-

बुद्धि और शिक्षा की देवी सरस्वती का प्रिय वाद्य यंत्र है वीणा। वीणा घर में रखेंगे तो सरस्वती की कृपा से सभी सदस्यों की बुद्धि का विकास होगा। मुश्किल परिस्थियों में भी धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा मिलेगी।

🙏3. घी :-

घर में घी हमेशा रखना चाहिए और नियमित रूप से इसका सेवन करते रहना चाहिए। घी से शक्ति मिलती है और शरीर स्वस्थ रहता है। घर में रोज शाम को घी का दीपक भी जलाना चाहिए। पूजा में भी घी का महत्व है। इसी वजह से घी को अनिवार्य रूप से घर में रखने की सलाह दी जाती है। घी का सेवन करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य कर लेना चाहिए।

🙏4. शहद :-

वास्तु की मान्यता है कि घर में शहद रखने से वास्तु के कई दोष शांत हो जाते हैं। साथ ही, पूजन में भी शहद जरूरी होता है। ये सभी देवी-देवताओं का अर्पित किया जाता है। जिन घरों में रोज पूजा की जाती है, उन घरों में शहद हमेशा ही होना चाहिए।

🙏5. पानी :-

घर में हमेशा ही साफ जल भरा रहना चाहिए। जब भी कोई मेहमान घर आए तो सबसे पहले उसे पीने के लिए शीतल जल अवश्य देना चाहिए। इससे कुंडली के कई दोष दूर होते हैं।

============================

                 

Wednesday, June 28, 2017

Yada Yada Hi Dharmasya

 यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ! अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानम सृज्याहम !!