Saturday, September 2, 2017

यक्ष-युधिष्ठिर संवाद



*🌷यक्ष-युधिष्ठिर की वार्ता🌷*


*यक्ष― कः पंडितः पुमान् ज्ञेयो ।*
*नास्तिकः कश्च उच्यते?*
*को मूर्खश्च कामः स्यात्;*
*को मत्सर इति स्मृतः ?*
कौन पंडित है? कौन नास्तिक है? कौन मूर्ख है और काम क्या है? तथा डाह किसे कहा गया है?



*युधिष्ठिर― धर्मज्ञः पंडितो ज्ञेयो ।*
*नास्तिको मूर्ख उच्यते ।।*
*कामः संसार हेतुश्च ।*
*ह्रत्तापो मत्सरः स्मृतः ।।*
धर्म का जानने वाला ही पंडित है। नास्तिक ही मूर्ख है। काम संसार का हेतु (कारण) है और ह्रदय का ताप ही डाह (ईर्ष्या) है।



*यक्ष― तपः किम् लक्षणम् प्रोक्त*
*को दमश्च प्रकीर्तितः ?*
*क्षमा च का परा प्रोक्ता,*
*का च ह्री परिकीर्तिता ?*
तप किसे कहते हैं? दम किसे कहते हैं? क्षमा और लज्जा किसे कहते हैं?



*युधिष्ठिर― तपः स्वधर्मे वर्तित्वं ।*
*मनसो दमनं दमः ।।*
*क्षमा द्वन्द्व-सहिष्णुत्वं ।*
*ह्रीरकार्य निवर्तनम् ।।*
अपने धर्म में स्थित रहना ही सबसे बड़ा तप है। मन को वश में करना ही दम है। कष्टों और प्रपंचों को सह लेना ही क्षमा है तथा अकार्यों से दूर रहना ही सच्ची लज्जा है।




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